मजदूरों की मौत पर ‘ठाठ’, कफन के लाखों रूपये डकार गए नौकरशाह

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लखनऊ: मजूदरों के कफन के सौदे का खेल नौकरशाही में लम्बे समय से खेला जा रहा है। दर्जन भर से ज्यादा जिलों में मृतक मजदूरों की बढती संख्या इस पोशीदा राज को खोलती है। लाभार्थी मजूदरों की मौत की संख्या में इजाफा ऊंची कुर्सियों पर बैठे हुक्मरानों की सदाशयता का नतीजा नहीं है, बल्कि उनकी मौत पर मिलने वाली आर्थिक सहायता के बंदरबांट का है। यह स्थिति एक ऐसा दुखदाई पहलू पेश करती है, जिससे यह पता चलता है कि जेब भरने के लिए हुक्मरान किसी हद तक जाने को कितने तैयार हैं।

सुल्‍तानपुर में सामने आया मामला

हालांकि अभी सिर्फ सुल्तानपुर जिले में उप्र भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत संचालित मृत्यु एवं विकलांगता सहायता योजना में 40 लाख रूपये का घोटाला सामने आया है। यहां घोटाले का खुलासा कुछ महिलाओं की शिकायत पर हुआ। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इसी तर्ज पर आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, कासगंज, इलाहाबाद, संतकबीरनगर, बांदा, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, गोण्डा, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच में मजदूरों की मौत पर इस योजना के तहत जिन लोगों को लाभ दिया गया है। इनमें ज्यादातर मामलों में सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई हैं। इस खेल में जिलों में मजदूरों की मौत के बाद उनका पंजीयन कराकर अनुग्रह राशि बांट लेने के मामले शक्ल ले रहे हैं। यदि तफ्तीश की जाए तो सूबे हर जिले में यह खेल खेलते हुक्मरान मिल जाएंगे।

ऐसे हुआ घोटाला

बोर्ड की योजना में सुल्तानपुर के सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भारी गड़बड़ी की। दलालों की मिलीभगत से मजदूरों के कफन तक का पैसा डकार लिया। यहां 40 लाख का घोटाला उजागर हुआ। यदि श्रम महकमे में पंजीकृत किसी मजदूर की मौत हो जाती है तो उसे दो लाख की सहायता देने का प्रावधान है। यह पैसा मृतक के आश्रितों के खाते में जाता है। पर यहां उल्टा हुआ। यह धनराशि मृतक के आश्रित के नाम से जारी तो हुई पर उसके खाते में नहीं जाकर महकमे के खास लोगों के खाते में चली गई।

विशेष सचिव ने जताई घोटाले की आशंका

विभागीय अधिकारी ही ऐसे जनपदों में घोटाले की आशंका जता रहे हैं। खुद संगीता सिंह, विशेष सचिव श्रम/सचिव, उप्र भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर ऐसी आशंका व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि जनपदों में आयोजित होने वाली समीक्षा बैठकों में अधीनस्थ श्रम कार्यालय द्वारा बोर्ड की योजनाओं में किए जाने कार्य की व्यापक समीक्षा की जाए। यद्यपि बोर्ड द्वारा अपनी सभी सेवाओं और योजनाओं को आधार सेवा से जोड़ने का काम प्रभावी ढंग से किया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को समाप्त किया जा सके।

अपर जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी करें मॉनिटरिंग

संगीता सिंह ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि बोर्ड की योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए अपर जिलाधिकारी स्तर के किसी अधिकारी को नामित करने का कष्ट करें, ताकि अपात्र व्यक्ति को अनुचित लाभ न मिले।

क्‍या है मृत्यु एवं विकलांगता सहायता योजना 

इस योजना के तहत निर्माण कार्य करते समय यदि श्रमिक की मौत हो जाती है या वह अपंग हो जाएं तो सरकार द्वारा पीड़ित श्रमिक या उस पर आश्रित परिजनों को सहायक धनराशि देने का प्रावधान है। कार्य स्थल पर दुर्घटना की स्थिति में अपंग होने पर श्रमिक को तीन लाख और सामान्य मृत्यु या कार्यस्थल से बाहर दुर्घटना की स्थिति में श्रमिक की मृत्यु होने पर आश्रित को दो लाख रुपए देने का प्रावधान है। योजना का मकसद दुर्घटना हो जाने पर पंजीकृत  श्रमिक और उसके आश्रितों को तत्कालिक राहत प्रदान करना है। योजना के तहत सभी पंजीकृत लाभार्थी कर्मकार या उनके आश्रितों जैसे कि पति/पत्नी, अविवाहित पुत्रियां, अवयस्क पुत्र या पंजीकृत लाभार्थी पर निर्भर माता-पिता को सहायता दी जाती है। पंजीकृत निर्माण श्रमिक की किसी दुर्घटना में मौत हो जाने पर 1 लाख रुपए की तत्काल सहायता देने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त 4 लाख की धनराशि सावधि जमा के रुप में आश्रितों को दी जाती है। तीन लाख रुपए कर्मकार की स्थायी पूर्ण अपंगता  या विकलांगता की स्थिति में और दो लाख रूपये स्थायी आंशिक अपंगता या विकलांगता पर बतौर अनुग्रह के रुप में देने की योजना है। इन परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य मृत्यु के अन्य कारणों में आश्रितों को एक लाख रुपए की सहायती देने की योजना है।

कैसे मिल सकता है योजना का लाभ

दुर्घटना के बाद लाभार्थी को हुई स्थायी अपंगता/ विकलांगता की दशा में निर्धारित प्रारुप-1 में आवेदन पत्र दो प्रतियों में दुर्घटना घटित होने की तिथि से 1 साल की अवधि में निकटतम श्रम कार्यालय एवं संबंधित तहसील के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अलावा संबंधित विकास खंड कार्यालय में खंड विकास अधिकारी को प्रस्तुत किया जा सकता है। जिसकी एक प्रति आवेदक को उपलब्ध कराई जाती है।

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Source: Hindi Newstrack