ड्रोन हमले में बाल-बाल बचे वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो, बोले- US और कोलंबिया ने कराया हमला

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काराकस: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो शनिवार को ड्रोन हमले में बाल-बाल बच गए। वे एक टीवी चैनल पर स्पीच दे रहे थे। तभी उनके पास विस्फोटक सामग्री से भरे कुछ ड्रोन गिरे थे। हालांकि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है। इस घटना के बाद मादुरो ने कहा है कि इस हमले के पीछे पड़ोसी देश कोलंबिया और अमेरिका में मौजूद अज्ञात फाइनैंसरों का हाथ है। ये हमला मुझें जान से मारने के लिए किया गया था।
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निकोलस मादुरो ने कही ये बातें

मादुरो ने कहा, ‘यह हमला मुझे मारने के लिए किया गया था, उन्होंने आज मुझे मारने की कोशिश की।’ मादुरो ने पड़ोसी कोलंबिया और अमेरिका में मौजूद कुछ फाइनैंसरों पर हत्या की कोशिश का आरोप लगाया तो वहीं कुछ अधिकारियों ने इसके पीछे वेनेजुएला के विपक्षी पार्टी का हाथ होने की आशंका जताई है। दूसरी तरफ कोलंबिया ने हमले के पीछे अपनी भूमिका से साफ इनकार कर दिया है। कोलंबिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर एएफपी को बताया कि मादुरो के आरोप आधारहीन हैं।

हमले में 7 सुरक्षाकर्मी घायल हुए

लाइव टीवी पर स्पीच के दौरान निकोलस के नजदीक विस्फोटक सामग्री से भरे कुछ ड्रोन गिरे। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह हमला उस समय हुआ जब मादुरो राजधानी कराकस में सैंकड़ो सिपाहियों के सामने स्पीच दे रहे थे। हालांकि राष्ट्रपति को किसी तरह की चोट नहीं लगी है। इस बारे में वेनेजुएला के सूचना मंत्री जॉर्ज रोड्रिग्ज ने कहा कि यह हमला मादुरो पर किया गया था। वह पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन 7 लोग घायल हो गए हैं।
बता दें कि जिस परेड में मादुरो स्पीच दे रहे थे वह संवैधानिक असेंबली की पहली वर्षगांठ के मौके पर आयोजित की गई थी। यह एक ऐसी असेंबली मानी जाती है जो मादुरो के वफादारों से भरी पड़ी है। खस्ताहाल अर्थव्यवस्था, लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक संकट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थल हो चुके वेनेजुएला में मादुरो सत्ता संभाले हुए हैं। वेनेजुएला कुछ बड़े तेल निर्यातक देशों में से एक माना जाता है। सैकड़ों हजारों वेनेजुएलाई नागरिक देश छोड़ कर भाग चुके हैं। देश में भोजन और दवाइयों की भयंकर कमी है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक महंगाई 10 लाख प्रतिशत तक बढ़ गई है। 55 साल के समाजवादी नेता मादरो ने साल 2013 में अपने मेंटर ह्यूगो शावेज से सत्ता का भार लिया था। इसके बाद उन्होंने कोर्ट, चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर नियंत्रण पाकर विपक्ष को एकदम किनारे कर दिया है। मादुरो को सेना का भी समर्थन हासिल है, जो सरकार में कई अहम पदों पर मौजूद है।
मादुरो अकसर देश के विपक्ष पर अमेरिका के साथ मिलकर उनका तख्तापलट करने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहते हैं। उनका कहना है कि फिलहाल देश की जो आर्थिक स्थिति है वह ‘आर्थिक युद्ध’ है और किसी भी तरह की अशांति विदेशी शक्तियों द्वारा सुनियोजित है।

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चुनाव का किया बहिष्कार

एक साल पहले देश में मादुरो की सत्ता के खिलाफ 4 महीने तक सड़कों पर प्रदर्शन हुए। इसके खिलाफ सेना ने सख्त कार्रवाई कर आंदोलन को कुचल दिया, जिसमें 125 लोगों की जान गई। इस प्रदर्शन की एक सबसे बड़ी वजह संवैधानिक असेंबली का गठन भी था, जिसे नैशनल असेंबली की ताकतों को कम करने के मकसद से बनाया गया। नैशनल असेंबली में साल 2015 के चुनावों में विपक्ष ने दमदार बहुमत हासिल किया था। बीते साल राष्ट्रपति ने कहा कि नई असेंबली ने निर्वाचित असेंबली की जगह ले ली है। सुप्रीम कोर्ट ने नैशनल असेंबली को भंग घोषित किया। हालांकि, यह फिर भी संचालित होती रही, इसके निर्णय नियमित रूप से रद्द कर दिए जाते हैं। अमेरिका और अन्य देश लगातार कहते आए हैं कि वेनेजुएला में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। इसी साल विपक्ष के बहिष्कार के बाद हुए चुनावों में मादुरो को एक बार फिर 6 साल का कार्यकाल मिला है।

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Source: Hindi Newstrack