मां का दूध व पहला दूध शिशु के लिए होता है अमृत

Health

एक से लेकर 7 अगस्त तक पूरी संसार में स्तनपान हफ्ते मनाया जा रहा है किसी भी जन्मजात बच्चे के लिए उसकी मां का पहला दूध सबसे बड़ी औषधी या कहें टॉनिक होता है कुछ लोग तो मां के पहले दूध की तुलना बच्चे के लिए अमृत से करते हैं लेकिन अफसोस की बात यह है कि हिंदुस्तान के अंदर ही 44 प्रतिशत बच्चों को मां का पहला दूध नहीं मिल पाता है अगर संसार की बात करें तो संसार भर में लगभग 7.8 करोड़ शिशु यानी प्रत्येक 5 में से 3 शिशुओं को जन्म के बाद शुरुआती पहले घंटे में स्तनपान नहीं कराया जाता है, जो उन्हें मौत  रोगों के उच्च जोखिम की ओर ले जा सकता है

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हालांकि हिंदुस्तान ने 2005-15 के एक दशक के भीतर कुछ प्रगति की है  जन्म के प्रथम घंटे में स्तनपान का आंकड़ा दोगुना हो गया है लेकिन राष्ट्र में सीजेरियन से पैदा होने वाले नवजात बच्चों के बीच स्तनपान की प्रक्रिया में बहुत ज्यादा कमी पाई गई फिर भी हिंदुस्तान में 44 प्रतिशत बच्चे इस अमृत समान दूध से वंचित रह जाते हैं
में साउथ-एशिया की क्षेत्रिय निदेशक डॉ पूनम खेत्रपाल सिंह ने बताया कि मां का पहला दूध मिलने से बच्चे में रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है उन्होंने बोला कि किसी भी मां को कम से कम 6 महीने तक अपने बच्चे को स्तनपान कराना चाहिए मां के दूध में इतनी ताकत होती है कि स्तनपान के दौरान बच्चे को अलावा खुराक की आवश्यकता नहीं होती है

डॉ पूनम खेत्रपाल सिंह ने बताया कि शिशु के ज़िंदगी के पहले छह महीने के लिए विशेष स्तनपान दो वर्ष  उससे अधिक आयु तक स्तनपान कराने के बाद आजीवन सेहत के लिए सबसे मजबूत आधार प्रदान करता है छह महीने की आयु के बाद अन्य पूरक खाद्य पदार्थों के साथ मिलकर बच्चे के लिए मां का दूध, पोषण  मोटापे की रोकथाम सहित ताउम्र उच्चतम पोषण स्थापित करने का एक ताकतवर माध्यम है

उन्होंने बताया कि विश्व सेहत संगठन द्वारा बच्चों के लिए मां के दूध की अहमियत को लेकर बड़े पैमाने पर जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है  अभियान का प्रभाव भी दिखने लगा हैहिंदुस्तान की महिलाएं इस मामले में तेजी से जागरुक हो रही हैं उन्होंने बताया कि शिशु के लिए मां के दूध के महत्व को लेकर नयी मां को शिक्षित करना महत्वपूर्ण है

उन्होंने बताया कि आज महिलाएं घर की चौखट लांघ कर समाज के हर एरिया में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही हैं ऐसे में उनके सामने कार्यस्थल पर स्तनपान की समस्या को देखते हुए बहुत सारी महिलाएं शिशुओं को स्तनपान करना से गुरेज करती हैं उन्होंने बताया कि कार्यस्थलों को ऐसा विकसित किया जाए, जहां सहजता से एक मां अपने बच्चे को दूध पिला सके

डॉ पूनम ने बताया कि सबसे पहले स्तनपान कराए जाने वाले जगह विकसित किए जाने चाहिए, फिर इन स्थानों के बारे में प्रचार करना चाहिए नयी माताओं को स्तनपान के लिए जागरुक करना होगा उन्होंने बोला कि अगर जन्म लेने वाले हर बच्चे को मां का पहला दूध मिलेगा तो निश्चित ही शिशु मृत्यु दर  बच्चों में कुपोषण की समस्या को बहुत ज्यादा हद तक दूर किया जा सकता है

विश्व सेहत संगठन ने बोला कि नियमित स्तनपान से हम हर वर्ष 8 लाख से अधिक बच्चों को बचाने में सफल हो सकते हैं

संपूर्ण आहार होता है मां का दूध
डब्ल्यूएचओ की सिफारिश के अनुसार नवजात शिशु के लिए पीला गाढ़ा चिपचिपा युक्त मां का पहला दूध एक संपूर्ण आहार होता है जिसे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद 1 घंटे के भीतर ही पिलाना प्रारम्भ कर देना चाहिए सामान्यता बच्चे को 6 महीने की अवस्था तक स्तनपान कराने की अनुशंसा की जाती है शिशु को 6 महीने की अवस्था  2 साल अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान कराने के साथ-साथ पौष्टिक पूरक आहार भी देना चाहिए जब तक बच्चा दूध पीता है तब तक स्तन में दूध पैदा होता है बच्चे के दूध पीना छोड़ने के बाद कुछ समय बाद अपने आप ही स्तन से दूध बनना बंद हो जाता है

स्तनपान के फायदे
बच्चे को उल्टी-दस्त यानी डायरिया जैसी बीमारी की आसार कम हो जाती है मां का दूध बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए अहम होता है बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है मां और बच्चे में भावनात्मक लगाव बढ़ता है मां का दूध न मिलने पर बच्चे में कुपोषण और सूखा जैसे रोग की आसार बढ़ जाती है स्तनपान से मां को स्तन केंसर की आसार कम हो जाती है

Source: Purvanchal media