क्या आपने कभी सोचा है कि शव यात्रा मे महिलाएं क्यो नहीं जाती?

Humer

रोचक डेस्क। हमारे हिन्दू धर्म में लोगों के लिए कई तरह के नियम बनाए गए है, ये नियम सदियों से चले आ रहे है। जिनका पालन करना इसांन अपना कर्तव्य समझता है। इन्ही में से एक नियम है कि व्यक्ति के मरने के बाद औरतों को शव यात्रा में जाने से मनाही होती है। यह​ नियम सदियोें से चला आ रहा है लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दे कि हिन्दू धर्म के किसी भी ग्रंथ में या किताब में ऐसा नहीं लिखा है कि शव यात्रा में महिलाओं की जाने से मनाहीं है। आज हम आपको इसके पीछे छुपे राज के बारे में बता रहे है।

कई जगह मान्यता है कि घर में मौंत हो जाने की वजह से घर अशुद्ध हो जाता है इसलिए शव यात्रा के बाद महिलाएं घरों की साफ सफाई करती है और घर को शुद्ध करती है। वहीं कही जगह माना जाता है कि शव को चिंता पर जलाने के दौरान शरीर अकडने लगता है और उसमें से अलग अलग तरह की आवाज आती है। महिलाएं दिल की काफी ​कमजोर होती है। इस लिए उन्हें इन सब चीजों से दूर रखा जाता है। माना जाता है कि शमशान घाट में दुख का माहौल ​होता है। महीलाओं के वहां रहने पर उन पर इस बात का नेगेटिव इफेक्ट पड सकता है।

वही वैज्ञानिकों की माने तो शव को जलाने के दौरान कई तरह के जीवाणु उस में से निकलते है जो आस पास मौजूद लोगों के शरीर में चले जाते र्है। आदमीयों के छोटे बाल होने के कारण वह तो किटाणु निकल जाते है लेकिन महिलाओं के लम्बे बाल होने के कारण वह शरीर मे ही रह जाते है जिस वजह से वह जल्दी बीमार पड जाते है या तबीयत खराब हो जाती है।

Source: Rochak khabare