अरबों की सम्पत्ति की मालकिन है ये लेडी, 33 की उम्र में 1 करोड़ से ज्यादा फॉलोवर

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नई दिल्ली: संत निरंकारी मिशन की आध्यात्मिक प्रमुख रहीं माता सविंदर हरदेव की मृत्यु के बाद अब मिशन की कमान छोटी बेटी सुदीक्षा के हाथ में होगी। इस समय संत निरंकारी मिशन की सम्पत्ति अरबों में है। जबकि दुनिया भर में एक करोड़ से ज़्यादा भक्त हैं। newstrack.com आज आपको संत निरंकारी मिशन की प्रमुख सुदीक्षा की अनटोल्ड स्टोरी के बारे में बता रहा है।

कौन है सुदीक्षा
सुदीक्षा का जन्म 13 अप्रैल, 1985 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने 2006 में एमिटी यूनिवर्सिटी से मोनो चिकित्सा में स्नातक किया। उसके बाद 2010 से संत निरंकारी मिशन के लिए विदेश का काम देखने लगीं। 33 वर्षीय सुदीक्षा के पति अवनीश सेतिया की भी कनाडा में बाबा हरदेव सिंह के साथ सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। बाबा हरदेव सिंह का कोई पुत्र नहीं है, उनकी तीन पुत्रियां है, जिनमें सुदीक्षा सबसे छोटी है।

जुलाई 2018 में मिली थी ये बड़ी जिम्मेदारी
जुलाई 2018 में ही निरंकारी मिशन के पूर्व सतगुरु स्वर्गीय बाबा हरदेव सिंह की छोटी बेटी सुदीक्षा को सद्गुरु बनाया गया था। सुदीक्षा की दो बड़ी बहनें भी थी लेकिन उन्हें मिशन में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। बुराड़ी के समागम मैदान में माता सविंदर हरदेव सिंह ने तिलक लगा कर इस बात की औपचारिक घोषणा की थी। अपनी बेटी को मिशन की जिम्मेदारी सौपने के बाद ही मां सविंदर हरदेव की डेथ हो गई थी।

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2016 में हो गई थी चूक
बताया जाता है कि सुदीक्षा को साल 2016 में पिता हरदेव की मृत्यु के बाद ही गद्दी मिलने की पूरी उम्मीद थी लेकिन किन्हीं कारणों से ऐसा संभव नहीं हो सका था। उसके बाद से ही लगातार सुदीक्षा के सद्गुरु बनाये जाने की चर्चा होती रहती थी। आखिरकार जुलाई 2018 में उनके नाम पर अंतिम मुहर लग गई। उन्हें निरकारी समाज का छठवां धर्म गुरु बनाया गया था।

27 देशों में फैला है निरंकारी मिशन
दुनिया भर के 27 देशों में निरंकारी मिशन की शाखाएं संचालित होती है। निरंकारी मिशन मुख्यालय दिल्ली में स्थित है। बताया जा रहा है कि विदेशों में मिशन के 100 से ज्यादा केंद्र हैं। भारत में भी करीब हर राज्यों में लाखों की संख्या में उनके अनुयायी हैं।

1929 में निरंकारी मिशन की स्थापना
संत निरंकारी मिशन की 1929 में स्थापना हुई थी। इस मिशन की 27 देशों में 100 शाखाएं चल रही हैं। भारत में भी तकरीबन हर राज्यों में लाखों की संख्या में उनके अनुयायी हैं। सुदीक्षा के पिता बाबा हरदेव सिंह को विश्व में मानवता की शांति के लिए कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ भी सम्मानित कर चुका है। निरंकारी मंडल की ओर से बुराड़ी स्थित मैदान में हर साल नवंबर में वार्षिक समागम का आयोजन किया जाता है। इसमें भारत समेत दुनिया भर के लाखों भक्त भाग लेते हैं।

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जानें कौन थे बाबा हरदेव सिंह निरंकारी
सुदीक्षा के पिता संत निरंकारी मिशन के प्रमुख बाबा हरदेव सिंह का जन्म 23 फरवरी, 1954 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली के संत निरंकारी कॉलोनी स्थित रोजेरी पब्लिक स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की थी। उसके बाद 1963 में उन्होंने पटियाला के बोर्डिंग स्कूल यादविंद्र पब्लिक स्कूल में दाखिला लिया। दिल्ली यूनिवर्सिटी से उन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने 1971 में एक सदस्य के रूप में निरंकारी सेवा दल ज्वॉईन कर लिया। 1975 में एक वार्षिक निरंकारी संत समागम के दौरान दिल्ली में उनकी शादी सविंदर कौर से हुई। अपने पिता की मौत के बाद 1980 में वे संत निरंकारी मिशन के मुखिया बने। उन्हें सतगुरू की उपाधि दी गई। 1929 में बाबा बूटा सिंह द्वारा संत निरंकारी मिशन की स्थापना की गई थी।

निरंकारी मिशन के ये हैं 6 गुरुओं के नाम

  1. संत बाबा बूटा सिंह जी, जो इनके परिवार से नहीं थे।
  2.  संत इनके दादा अवतार सिंह जी।
  3.  संत इनके पिता बाबा गुरबचन सिंह
  4. संत थे बाबा हरदेव सिंह जी।
  5. माता सविंदर हरदेव
  6. बाबा हरदेव सिंह की छोटी बेटी सुदीक्षा

 

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