गरीबों को मिली बड़ी खुशखबरी: 15 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी देगी सरकार

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प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने राज्यों को थोक बाजार भाव से 15 रुपये प्रति किलो कम पर दलहन देने का फैसला किया है। राज्य सरकारें कल्याणकारी योजनाओं के तहत इन दालों का वितरण करेंगी।
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इस योजना के तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के सरकारों को वर्तमान थोक बाजार भाव में 15 रुपये प्रति किलोग्राम कम दर पर 34.88 लाख मीट्रिक टन तूर, चना, मसूर, मूंग और उड़द दाल देने का प्रस्ताव किया गया है। यह पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा। प्रदेश सरकारें इस दलहन को मिड-डे मील, जन वितरण प्रणाली, एकीकृत बाल विकास जैसी कल्याणकारी योजनाओं में इस्तेमाल करेंगी। यह उपलब्धता 12 महीने की अवधि या 34.88 लाख मीट्रिक टन दलहन के स्टॉक में जो भी पहले हो, के आधार पर होगी।

बैठक के बाद कानून और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार इस योजना के कार्यान्वयन के लिए 5237 करोड़ रुपये खर्च करेगी। मालूम हो कि देश में पिछले दो सालों में दलहन का अब तक का सबसे ज्यादा उत्पादन हुआ है। मूल्य समर्थन योजना के तहत सरकार ने 2017 और 2018 में दलहन की रिकॉर्ड खरीदारी की है। योजना के तहत दलहन की 45.43 लाख मीट्रिक टन की रिकॉर्ड खरीदारी की गई।

ओबीसी छात्रों को मैट्रिक के बाद छात्रवृत्ति जारी रखने की मंजूरी
मंत्रिमंडलीय समिति ने वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना के तहत देश में पढ़ने वाले ओबीसी छात्रों के लिए मैट्रिक के बाद छात्रवृत्ति में संशोधन एवं उसे जारी रखने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।

इसके तहत माता-पिता की वार्षिक आमदनी की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किया जाएगा। 30 फीसदी रकम छात्राओं के लिए रखी जाएगी, जबकि 5 फीसदी दिव्यांग छात्रों के लिए होगी। इस योजना पर करीब 3,085 करोड़ रुपये खर्च होगा। वर्ष 1998-99 से जारी योजना से हर साल करीब 40 लाख ओबीसी छात्रों को दसवीं के बाद पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलती है।

ओबीसी के उप-वर्ग निर्धारण के लिए आयोग का कार्यकाल बढ़ा
मंत्रिमंडल ने केंद्रीय सूची में अन्य पिछड़ा वर्गों के उप-वर्ग निर्धारण के लिए आयोग की अवधि को नवंबर, 2018 तक विस्तार दिया गया है। आयोग ने सभी हितधारकों से गहन चर्चा की, जिनमें राज्य सरकार, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और विभिन्न पिछड़ा वर्ग से संबंधित आम लोग शामिल थे।

Source: Purvanchal media