रामपुर के ऐतिहासिक मंदिरो को सतलुज का खतरा

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रामपुर बुशहर / विशेषर नेगी

हिमाचल के पहाड़ो पर लगातरा तेज बारिश के कारण सतलुज और इस की
सहायक नदियों जलस्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जलस्तर बढ़ने से
नदी तट की बस्तियों पर भी खतरा मडरा रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी
के दोनों ओर भूमि कटाव तेजी से हो रहा है। इस से सतलुज नदी किनारे बसे
रामपुर की ऐतिहासिक नगरी को भी खतरा बना है। लोगो का कहना है की नदी का
जलस्तर बढ़ने के साथ बहाव तेज होने से किनारो में भूमि कटाव हो रहा है।
इस से रामपुर के नदी तट के साथ बने आधा दर्जन से अधिक ऐतिहासिक महत्व
वाले मंदिरो को नुकसान होने का अंदेशा बना है।
लोगो का कहना है की बरसात के दौरान नदी किनारो पर सुरक्षा
दीवार ना होने से खतरे की स्थिति आम हो गई है। रेतीली मिटटी होने के
कारण भूमि कटाव का खतरा अधिक हो गया है। लोगो ने नदी तट के किनारो में
दोनों ओर शिमला और कुल्लू जिला क्षेत्र में बस्तियों के साथ कंक्रीट की
मज़बूत दीवार लगाने की मांग उठाई है। ताकि लोगो में सुरक्षा का माहौल बना
रहे।
सत्यनारायण मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष रोशन चौधरी ने बताया
की रामपुर में सतलुज नदी तेजी से भयंकर रूप धारण कर बह रही है। उस से
रामपुर को खतरा है बना है ,ख़ास कर शहर के प्रमुख इस की जद में आ सकते है।
,उन्होंने शीघ्र अति शीघ्र नदी तट के साथ नदी के दोनों ओर मज़बूत कंक्रीट
दीवार लगाने की मांग उठाई है।
रामपुर के ब्यवसायी सुरेंद्र कुमार ने बताया रामपुर सतलुज
किनारे पर बसी ऐतिहासिक नगरी है। यह ब्यापारिक एवं धार्मिक दृष्टि से
महत्व रखता है। यहां कई प्राचीन मंदिर है। दो हजार की सतलुज बाढ़ के बाद
नदी तट के दोनों किनारे कमजोर हुए है। और बरसात में पानी बढ़ते ही भूमि
कटाव नदी के दोनों ओर हो रहा है। इस लिए सुरक्षा दीवार लगाना जरूरी हो
गया है। उधर प्रशासन की ओर एसडीएम रामपुर नरेंद्र चौहान का कहना हैकि
नदी किनारे न जाने की लोगो को हिदायत दी जा रही। नदी के साथ के रिहाइशों
में रह रहे लोगो को सचेत रहने के लिए कहा गया गई।

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