सतलुज बेसिन की जल विद्युत परियोजनाएं चौथे दिन भी ठप, अकेले एसजेवीएन को 50 करोड़ की चपत

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रामपुर बुशहर / विशेषर नेगी

हिमाचल प्रदेश के सतलुज बेसिन पर बनी तीन बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं से
चौथे दिन भी विद्युत उत्पादन ठप रहा। इस से अकेले केंद्र और प्रदेश सरकार
के संयुक्त उपक्रम एसजेवी एन को ही पचास करोड़ से अधिक का नुक्सान हुआ है।
हिमाचल के ऊपरी क्षेत्र के पहाड़ों पर अधिक बारिश के कारण सतलुज की
सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ अधिक मटमैला हो गया है। इससे सतलुज
में सिल्ट की मात्रा में रिकार्ड वृद्धि दर्ज कर दी गई है। परियोजना
निर्माताओं के अनुसार सतलुज नदी का जलस्तर बीते रोज से 2 सौ क्यूमेक्स
अधिक हो गया है जबकि सिल्ट 20 हजार पीपीएम से लेकर 60 हजार पार्ट पर
बिलियन तक पहुंच गया है। ऐसे में सतलुज नदी का जल जल्द साफ होने की
संभावना कम हो गई है। पंद्रह सौ मेगावाट की देश की सबसे बड़ी भूमिगत जल
विद्युत परियोजना के प्रमुख संजीव सूद का कहना है कि नाथपा बांध स्थल पर
जलस्तर एक हजार क्यूमेक है जबकि सिल्ट की मात्रा 20हजार से लेकर 60
हजार पीपीएम तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि चौथे दिन भी बिजली
उत्पादन करना अधिक सिल्ट के कारण संभव नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है
किसतलुज नदी पर बनी नाथपा -झाकड़ी से 15 मेगावाट, करछम वांगतू से 1000
मेगावाट , रामपुर परियोजना से 412 मेगावाट बिजली तैयार की जाती है। जो
उत्तरी भारत के 9 राज्यों को सप्लाई होती है। नाथपा झाकड़ी और रामपुर
परियोजना का संचालन एसजेवीएन कर रही है जबकि करछम वांगतू निजी क्षेत्र
में है। अकेले नाथपा झाकड़ी से हिमाचल व् केंद्र सरकार को दैनिक 10
करोड़ की आमदनी होती है। अब तक 4 दिनों में परियोजना बंद होने के कारण
अकेले एसजेवीएन को 50 करोड से अधिक का नुकसान हुआ

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