प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कसा तंज उन्हीं पर पड़ रहा है भारी

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देश के संसदीय इतिहास में संभवत: यह पहली बार हुआ है, जब प्रधानमंत्री की टिप्पणी को रिकार्ड से निकालने की नौबत आई हो। राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सदस्य प्रो. मनोज झा के प्वाइंट ऑफ आर्डर के चलते सभापति एम वेंकैया नायडू को ऐसा करना पड़ा। राज्यसभा सचिवालय के अनुसार सभापति के निर्देश के बाद प्रधानमंत्री के वक्तव्य से एक अंश हटा दिया गया है। वहीं विपक्ष के उपसभापति के उम्मीदवार बीके हरिप्रसाद के शब्दों में यह प्रधानमंत्री द्वारा सदन की गरिमा को गिराने का साफ उदाहरण है।
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बीके हरिप्रसाद ने नौ अगस्त को भी इसे अपमानजनक टिप्पणी माना था। उन्होंने विशेष बातचीत के दौरान कहा था कि देश के प्रधानमंत्री को अपना स्तर गिराकर इस तरह से टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। हालांकि कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी पर बृहस्पतिवार को ही आपत्ति जता दी थी।

क्या हुआ था

राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सदन में मौजूद थे। एनडीए की तरफ से हरिवंश नारायण सिंह उम्मीदवार थे और उनके मुकाबले में कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद थे। हरिप्रसाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। वह पार्टी के महासचिव और राज्यों के प्रभारी भी रह चुके हैं। हरिवंश और हरिप्रसाद दोनों के नाम में हरि शब्द मौजूद है। प्रधानमंत्री ने एनडीए उम्मीदवार की जीत के बाद अपने वक्तव्य में इस हरिशब्द का बखूबी इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास कि अब सदन पर हरिकृपा बनी रहेगी। अब सबकुछ हरि भरोसे। दोनों तरफ हरि थे। यहां तक तो ठीक था, लेकिन इसके आगे प्रधानमंत्री ने जो कहा, वह मर्यादा के खिलाफ था। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक के आगे बीके था, बी के हरि, कोई न बिके और एक के आगे कोई बी के  वी के नहीं था।

प्रधानमंत्री की मंशा ठीक नहीं

प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य पर मनोज झा ने सवाल उठाया। उन्होंने अपने सवाल और प्वाइंट ऑफ आर्डर में प्रधानमंत्री की मंशा पर सवाल उठाया था। मनोज झा के इस प्वाइंट ऑफ आर्डर पर सभापति ने ध्यान देने का आश्वासन दिया था। सूत्र बताते हैं कि सभापति के निर्देश पर बाद में राज्यसभा सचिवालय ने प्रधानमंत्री के वक्तव्य में से बिके जैसे अंश हटा दिए हैं। इस बारे में कांग्रेस पार्टी के नेता का कहना है कि प्रधानमंत्री को ध्यान देना चाहिए। आखिर वह क्या कर रहे हैं? क्यों ऐसी नौबत आ रही है कि उनके द्वारा कहे गए वाक्य में इस तरह के अंश हैं, जिन्हें हटाना पड़ रहा है।

Source: Purvanchal media