शेल्टर होम में रेप जैसी भयावह घटनाएं कब रुकेंगी

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बिहार और उत्तर प्रदेश के शेल्टर होम में यौन शोषण की घटनाओं पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आखिर ऐसी भयावह घटनाएं कब रुकेंगी। शीर्ष अदालत ने एक अनाथालय में यौन उत्पीड़न के मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।
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जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘कल हमने पढ़ा कि उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में कई महिलाओं से दुष्कर्म हुआ और कई गायब हैं। आखिर ऐसी घटनाएं कैसे और कब रुकेंगी।’ गौरतलब है कि प्रतापगढ़ के एक शेल्टर होम से 26 महिलाएं गायब पाई गई हैं।

मामले में न्यायमित्र अपर्णा भट्ट ने कहा कि सरकार को चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन (सीसीआई) की सूची और सोशल ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करनी था, लेकिन उनकी ओर से कोई पेश नहीं हुआ है। इस पर पीठ ने कहा कि जब तक सरकार आगे नहीं आएगी, तब तक हम कुछ नहीं कर सकते। बाद में गृह मंत्रालय और महिला व बाल विकास मंत्रालय के वकील पेश हुए। इस पर पीठ ने कहा कि अलग मंत्रालयों के लिए अलग वकील क्यों हैं। इस मामले में सिर्फ महिला व बाल विकास मंत्रालय की दरकार है।

पूछा, क्या प्रतापगढ़ और देवरिया में ऑडिट किया
भट्ट ने कहा कि केंद्र को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के जरिये सभी बाल कल्याण संस्थाओं का सोशल ऑडिट करना था, लेकिन बिहार, यूपी समेत कुछ राज्य सहयोग नहीं कर रहे हैं। पीठ ने पूछा कि क्या एनसीपीसीआर ने प्रतापगढ़ और देवरिया में सोशल ऑडिट किया है। इस पर एनसीपीसीआर ने बताया कि यूपी, बिहार, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और मिजोरम ने इसकी इजाजत नहीं दी है। हालांकि, देश के 3000 शेल्टर होम का सोशल ऑडिट हो चुका है।

ऑडिट की गुणवत्ता अहम, रेप हुआ तो कौन जिम्मेदार : कोर्ट
पीठ ने कहा, ‘सोशल ऑडिट की संख्या नहीं, गुणवत्ता अहम है। क्या एनसीपीसीआर को नहीं पता कि क्या हो रहा है? अगर इन 3000 शेल्टर होम में दुष्कर्म होता है तो क्या आप जिम्मेदार होंगे?’ केंद्र के वकील ने कहा कि वह एक हफ्ते में सभी जानकारी दे देंगे।

यौन शोषण के मामलों की रिपोर्टिंग का होगा परीक्षण
जब न्यायमित्र इंदिरा जयसिंह ने कहा कि पीड़िताओं की पहचान मीडिया में उजागर की जा रही है तो पीठ ने कहा कि यौन शोषण के मामलों में रिपोर्टिंग पर अंकुश लगाने वाले प्रावधानों का परीक्षण किया जाएगा।

Source: Purvanchal media